[male
vocals] (
हल्
की
ता
ल,
सका
रा
त्
मक
धु
न)
ला
मू
की
गलि
यों
में
गूं
जे
एक
ही
ना
म
वि
का
स
की
कि
रण,
अब
हो
रहा
है
का
म
मा
रु
बु,
मा
रु
बु,
सब
कहते
हैं
आज
जनता
की
से
वा
ही,
है
जि
नका
रा
ज
ला
मू
की
मा
टी
से,
जो
जु
ड़ी
है
पहचा
न
मा
रु
बु
का
ना
म,
अब
सबकी
है
जु
बा
न
बि
ना
कि
सी
दि
खा
वे
के,
जो
का
म
कर
गए
यु
वा
ओं
की
हि
म्
मत,
बनकर
वो
उभर
गए
महि
ला
ओं
के
हक
में,
जो
खड़े
रहते
हैं
बदला
व
की
बा
तें,
वो
सरे
आम
कहते
हैं
हर
एक
घर
में
अब,
खु
शहा
ली
की
आस
है
मा
रु
बु
के
आने
से,
बढ़
गया
वि
श्
वा
स
है
मा
रु
बु
को
चु
नें,
अब
सी
ने
ट
की
बा
री
है
ला
मू
की
तरक्
की
की,
नई
तै
या
री
है
सबके
लि
ए
जी
ते,
सबके
लि
ए
लड़ते
हैं
मा
रु
बु
हमा
रे,
दि
ल
में
सदा
बसते
हैं
शि
क्
षा
का
चि
रा
ग,
जो
उन्
हों
ने
जला
या
है
NGAAF
के
जरि
ए,
हक़
सबको
दि
ला
या
है
गरी
ब
के
बच्
चे
भी,
अब
स्
कू
ल
जा
ते
हैं
मा
रु
बु
की
मे
हनत
का,
फल
ये
खा
ते
हैं
सड़क
से
ले
कर,
पा
नी
तक
की
सु
वि
धा
वि
का
स
की
रा
हों
पर,
मि
टा
दी
है
बा
धा
सच्
चा
ई
की
रा
ह
पर,
जो
अडि
ग
चलते
हैं
लो
ग
उनके
सा
थ,
अब
शा
न
से
चलते
हैं
मा
रु
बु
को
चु
नें,
अब
सी
ने
ट
की
बा
री
है
ला
मू
की
तरक्
की
की,
नई
तै
या
री
है
सबके
लि
ए
जी
ते,
सबके
लि
ए
लड़ते
हैं
मा
रु
बु
हमा
रे,
दि
ल
में
सदा
बसते
हैं
न
को
ई
भे
दभा
व,
न
को
ई
बड़ी
बा
त
बस
वि
का
स
की
गं
गा,
हो
सबके
सा
थ २०२७
की
गूँ
ज,
अब
चा
रों
ओर
है
मा
रु
बु
की
जी
त,
अब
पू
रे
जो
र
पर
है
इको
लो
व
से
ले
कर,
हर
को
ना
महका
है
वि
का
स
की
लहर
का,
ये
ही
तो
पहि
या
है
हिं
दी
की
सड़कें,
अब
चमचमा
रही
हैं
तरक्
की
की
खु
शि
यां,
अब
सब
पा
रही
हैं
वि
श्
वा
स
का
रि
श्
ता,
अब
और
गहरा
हो
ला
मू
के
भवि
ष्
य
का,
सपना
सु
नहरा
हो
मा
रु
बु
को
चु
नें,
अब
सी
ने
ट
की
बा
री
है
ला
मू
की
तरक्
की
की,
नई
तै
या
री
है
सबके
लि
ए
जी
ते,
सबके
लि
ए
लड़ते
हैं
मा
रु
बु
हमा
रे,
दि
ल
में
सदा
बसते
हैं
आगे
बढ़ो
ला
मू,
ये
वक्
त
हमा
रा
है
मा
रु
बु
के
सा
थ,
ये
सफर
प्
या
रा
है
सी
ने
ट
की
ओर,
कदम
बढ़
चु
के
हैं
मा
रु
बु
के
सा
थ,
सब
जु
ड़
चु
के
हैं
आगे
बढ़ो
ला
मू,
ये
वक्
त
हमा
रा
है