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आज क़यामत होगी

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Lyrics

[male vocals] ओह

हो,

ओए,

सु

ना

मे

री

दि

लरु

बा,

आज

क़

या

मत

हो

गी

मे

री

दि

लरु

बा,

आज

क़

या

मत

हो

गी

ते

री

गलि

यों

में

मो

हब्

बत

हो

गी

शहर-ए-वफ़ा

में

ते

री

ही

ज़

मा

नत

हो

गी

जि

गली

से

तू

गु

ज़

रे

गी

इतरा

ती

हु

उसी

गली

में

आज

इश्

क़

की

इबा

दत

हो

गी

मे

री

दि

लरु

बा,

आज

क़

या

मत

हो

गी

ते

री

जु

ल्

फ़ों

के

सा

में

ढले

गी

ये

शा

लबों

से

नि

कले

गा

सि

र्

फ़

ते

रा

ही

ना

रु

सवा

इयों

का

डर

अब

छो

ड़

दि

या

हमने

ते

री

गलि

यों

में

तो

बस

मो

हब्

बत

हो

गी

ते

री

गलि

यों

में

तो

बस

मो

हब्

बत

हो

गी

खा

मो

शि

याँ

भी

आज

नग्

मे

गु

नगु

ना

एं

गी

हवा

एँ

भी

ते

री

खु

शबू

चु

रा

कर

ला

एं

गी

दर्

द-ए-दि

का

हि

सा

माँ

गें

गे

ज़

मा

ने

से

पर

मे

री

हर

सां

में

ते

री

ही

हि

फ़ा

ज़

हो

गी

क्

या

बा

है,

ओए,

तू

ही

तू

है

ते

री

जु

ल्

फ़ों

के

सा

में

ढले

गी

ये

शा

लबों

से

नि

कले

गा

सि

र्

फ़

ते

रा

ही

ना

रु

सवा

इयों

का

डर

अब

छो

ड़

दि

या

हमने

ते

री

गलि

यों

में

तो

बस

मो

हब्

बत

हो

गी

ते

री

गलि

यों

में

तो

बस

मो

हब्

बत

हो

गी

ना

ते

रा

हो

गा,

चर्

चे

भी

ते

रे

हों

गे

इश्

क़

के

इस

खे

में

सब

प्

या

दे

ते

रे

हों

गे

आज

टू

टे

गी

हर

वो

रस्

म-ओ-रि

वा

यत

जहाँ

सि

र्

फ़

और

सि

र्

फ़

ते

री

ही

चा

हत

हो

गी

धू

मचे

गी

दि

में,

ओए

ते

री

सा

दगी

ने

ये

कै

सा

जा

दू

कि

या

है

मैं

ने

तो

अपना

सब

कु

तु

झपे

ही

लु

टा

दि

या

है

अब

को

ज़ु

स्

तजू

नहीं

को

और

ख्

वा

हि

नहीं

बस

ते

री

बा

हों

में

ये

ज़िं

दगी

बसर

हो

गी

ते

री

जु

ल्

फ़ों

के

सा

में

ढले

गी

ये

शा

लबों

से

नि

कले

गा

सि

र्

फ़

ते

रा

ही

ना

रु

सवा

इयों

का

डर

अब

छो

ड़

दि

या

हमने

ते

री

गलि

यों

में

तो

बस

मो

हब्

बत

हो

गी

ते

री

गलि

यों

में

तो

बस

मो

हब्

बत

हो

गी

ना

ते

रा

हो

गा,

चर्

चे

भी

ते

रे

हों

गे

इश्

क़

के

इस

खे

में

सब

प्

या

दे

ते

रे

हों

गे

आज

टू

टे

गी

हर

वो

रस्

म-ओ-रि

वा

यत

शहर-ए-वफ़ा

में

ते

री

ही

ज़

मा

नत

हो

गी

जि

गली

से

तू

गु

ज़

रे

गी

इतरा

ती

हु

उसी

गली

में

आज

इश्

क़

की

इबा

दत

हो

गी

मे

री

दि

लरु

बा,

आज

क़

या

मत

हो

गी

मे

री

दि

लरु

बा,

आज

क़

या

मत

हो

गी

मे

री

दि

लरु

बा,

आज

क़

या

मत

हो

गी

ते

री

गलि

यों

में

मो

हब्

बत

हो

गी

शहर-ए-वफ़ा

में

ते

री

ही

ज़

मा

नत

हो

गी

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