A song made by shree sai jan care hospital
A song made by shree sai jan care hospital
ऐ मोहब्बत, तुझसे शिकायत है...
ऐ मोहब्बत, तुझसे एक गहरी शिकायत है,
तू कहने को तो इबादत है, पर बड़ी कयामत है।
दिलाकर ख्वाब जन्नत के, ज़मीन पर छोड़ देती है,
तेरी इस बेरुखी से अब दिल को बड़ी हैरत है।
ऐ मोहब्बत, तुझसे एक छोटी सी शिकायत है,
तू जिसे भी होती है, बस बेहिसाब होती है।
पहले तो ख्वाबों की हसीन दुनिया सजाती है,
फिर रातों की नींदें चुराकर सजा सुनाती है।
शिकायत है कि तू कभी खुलकर बात नहीं करती,
जो दर्द देती है, उसकी कोई दवा नहीं रखती।
हँसते हुए चेहरों को पल में रुला देती है,
और रोते हुए दिल को जीने की वजह देती है।
तुझसे शिकायत है कि तू इम्तिहान बहुत लेती है,
वफ़ा के बदले अक्सर बेवफ़ाई का सिला देती है।
जो पास हैं, उन्हें कद्र करना नहीं सिखाती,
और जो दूर हैं, उनकी यादों में तड़पाती है।
पर ऐ मोहब्बत, इस शिकायत में भी एक चाहत है,
कि तू लाख दर्द दे, पर दिल को तुझी से राहत है।
तू है तो ये दुनिया जीने के काबिल लगती है,
वरना हर धड़कन, इस सीने में अधूरी सी लगती है।
हाँ, तुझसे शिकायत है... पर तुझसे ही इबादत है।
ऐ मोहब्बत, तुझसे एक गहरी शिकायत है,
तू कहने को तो खुदा की इनायत है।
पर जिसे भी मिली तू इस जहां में,
क्यों उसी के दिल की तूने की हिदायत है?
तूने हंसाया भी तो बस कुछ पलों के लिए,
और रोने को उम्र भर की मोहलत दे दी।
जगाए रखे तूने रात भर ख़्वाब सुनहरे,
फिर जागती आँखों को तन्हाई की आदत दे दी।
शिकायत है कि तू कभी खुलकर नहीं मिलती,
आती है दबे पांव, पर तबाही सरेआम करती है।
बाँधती है दो दिलों को रेशम के धागे से,
फिर उसी धागे से सांसें नीलाम करती है।
तूने वादे तो सिखाए वफ़ा के बड़े-बड़े,
पर मुकर जाने का हुनर क्यों नहीं सिखाया?
जो छोड़ गए तन्हा हमें इस मोड़ पर आकर,
उन्हें भूल जाने का कोई रास्ता क्यों नहीं दिखाया?
तू दर्द देती है और दवा भी खुद को कहती है,
ये कैसा फ़रेब है जो तू सरे-बाजार करती है।
धड़कनें छीन लेती है तू सीने से हंसकर,
और कहती है कि तू रूह को आबाद करती है।
ऐ मोहब्बत, तुझसे शिकायत है मुझे बेहद,
कि तूने हर आशिक़ को बस आजमाया है।
जो बह गए आंसुओं में, वो कभी उभर न सके,
तूने मंज़िल से ज़्यादा सिर्फ रास्ता भटकाया है।
पर अजीब कशिश है तेरी इस बेरुखी में भी,
कि चोट खाकर भी दिल तुझपे ही मरता है।
तू लाख सितम कर ले इस टूटे हुए दिल पर,
ये नादान आज भी सिर्फ तुझसे ही उम्मीद करता है।
ऐ मोहब्बत, जरा पास आ, तुझसे कुछ हिसाब करना है,
जो जख्म दिए हैं तूने, उन पन्नों को बेनकाब करना है।
तूने वादे तो किए थे आसमां छूने के, पर जमीन पर ला पटका,
एक हंसी की खातिर, तूने उम्र भर का रोना सौंप दिया।
शिकायत है मुझे तेरी उस पहली रुमानी आहट से,
जिसने बहका दिया था इस दिल को अपनी झूठी चाहत से।
तूने दिखाया था जो ख्वाबों का एक हसीन सा आशियाना,
वो तो ताश के पत्तों की तरह निकला, पल में ढह जाने वाला फसाना।
शिकायत है तेरी उन खामोश, तन्हा और लंबी रातों से,
जहां दिल आज भी उलझा रहता है पुरानी उन बातों से।
जब नींद आंखों से रूठ जाती है और अश्क बहते हैं बेहिसाब,
तब तेरी दी हुई वो मीठी यादें बन जाती हैं एक खौफनाक अज़ाब।
तूने सिखाया था कि जीना किसे कहते हैं, मुस्कुराना किसे कहते हैं,
पर ये न बताया कि जब तू छोड़ जाए, तो इस खालीपन को कैसे सहते हैं।
भरे बाजार में लाकर तूने इस कदर अकेला छोड़ दिया,
कि अब तो खुद के साए ने भी हमसे अपना रुख मोड़ लिया।
मगर इस गिला-शिकवे के बीच, एक अजीब सा सच ये भी है,
कि तुझसे बेइंतहा नफरत में भी, कहीं न कहीं तू ही है।
शिकायत तो बहुत है तुझसे, ऐ मेरी जिंदगी के रहनुमा,
पर सच तो ये है कि इस तबाही के बाद भी, ये दिल धड़कता सिर्फ तेरे ही नाम पर है।
ये मोहब्बत, तुझसे शिकायत है,
कि तूने हर कदम पर सिर्फ आज़माइशें दी हैं।
जिस दिल को सुकून की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी,
उसी को तूने बेइंतहा बेताबियाँ और तन्हाइयाँ दी हैं।
शिकायत है कि तू ख़्वाब तो मखमली दिखाती है,
मगर जब आँख खुलती है, तो तलवों में चुभते हैं काँटें।
तूने मिलन के पल तो चंद लम्हों में समेट दिए,
और सदियों जैसे लंबे कर दिए जुदाई के ये सन्नाटे।
ये मोहब्बत, तुझसे शिकायत है,
कि तूने धड़कनों को किसी और की जागीर बना दिया।
हम जो कभी अपनी ही मर्ज़ी के मालिक हुआ करते थे,
हमें एक बेपरवाह शख्स की चाहत का असीर (कैदी) बना दिया।
जब वो करीब होता है, तो तू ज़माने को भुला देती है,
पर जब वो दूर जाए, तो हर महफ़िल में वीरानी सजा देती है।
ये कैसा तराज़ू है तेरा, ये कैसी तेरी रीत है,
जहाँ खुद को पूरी तरह हार कर ही समझ आती ये जीत है?
मगर सुन ऐ मोहब्बत, ये शिकायत सिर्फ एक गिला नहीं,
यह इकरार है कि तेरे दिए ज़ख्मों की कोई दवा नहीं।
शिकायत है तुझसे, पर फिर भी तुझसे ही ये आस है,
क्योंकि इस दर्द के बिना, यह ज़िंदगी पूरी तरह बेअसर और बेआवाज़ है।