[female vocals] ओह
हो...
सु
न
ना...
जिं
दगी,
मैं
तु
झे
कहाँ
मि
लूँ?
ये
जिं
दगी,
मु
झे
तू
बता,
मैं
तु
झे
कहाँ
मि
लूँ?
ते
री
भा
गदौ
ड़
में
सहमा
हु
आ,
मैं
कि
स
मो
ड़
पर
रु
कूँ?
क्
या
मि
लूँ
तु
झे
मैं
बचपन
के
उस
पु
रा
ने
का
गज़
की
ना
व
में?
या
कड़
कड़ा
ती
धू
प
के
बा
द,
पी
पल
की
उस
ठं
डी
छाँ
व
में?
ये
रा
स्
ता
भी
अब
अं
जा
ना
सा
लगता
है
हर
लम्
हा
मे
रा
खु
द
से
ही
टकरा
ता
है
ओ
जिं
दगी,
मैं
तु
झे
कहाँ
मि
लूँ?
क्
या
खु
द
को
खो
कर
ही
मैं
तु
झे
चु
नूँ?
तू
धड़
कन
है,
तू
ही
मे
री
तला
श
है
तू
ही
तो
मे
रे
हर
खा
मो
श
लफ्
ज़
की
प्
या
स
है
जिं
दगी,
मैं
तु
झे
कहाँ
मि
लूँ?
क्
या
तू
मि
ले
गी
मु
झे
कि
सी
पु
रा
नी
डा
यरी
के
धू
ल
भरे
पन्
नों
पर?
या
दबी
हु
ई
उन
खा
मो
श,
अधू
री
-सी
हसरतों
के
पन्
नों
पर?
मैं
ढूँ
ढता
रहा
तु
झे
अक्
सर
ओहदों
में,
मका
नों
में
कि
रा
ए
के
इन
शहरों
में,
मतलबी
दु
का
नों
में
पर
तू
तो
शा
यद
बै
ठी
थी
कहीं
को
ने
में
मु
स्
करा
ती
हु
ई
चा
य
की
कु
ल्
हड़
से
उठते
उस
गरम
धु
एँ
में
मु
स्
कु
रा
ती
हु
ई
ओ
जिं
दगी,
मैं
तु
झे
कहाँ
मि
लूँ?
क्
या
खु
द
को
खो
कर
ही
मैं
तु
झे
चु
नूँ?
तू
धड़
कन
है,
तू
ही
मे
री
तला
श
है
तू
ही
तो
मे
रे
हर
खा
मो
श
लफ्
ज़
की
प्
या
स
है
जिं
दगी,
मैं
तु
झे
कहाँ
मि
लूँ?
बता
दे
जिं
दगी,
क्
या
तू
वक्
त
के
आगे
दौ
ड़
ने
में
मि
ले
गी?
या
ठहर
जा
ने
की
उस
खा
मो
श
रस्
म
में
मि
ले
गी?
कभी
शा
म
ढले,
कभी
सु
बह
की
पहली
कि
रन
में
या
बि
खर
जा
ने
के
बा
द,
फि
र
से
सं
वरने
में
मि
ले
गी?
क्
या
बा
त
है,
ये
सन्
ना
टा
भी
कु
छ
कहता
है
मे
रे
दि
ल
का
ये
आइना
अब
खु
द
को
ही
ढूँ
ढता
रहता
है
कभी
हँ
सती
हु
ई
तू
आ
जा
ती
है
बा
रि
श
की
बूं
दों
में
कभी
छु
प
जा
ती
है
भी
ड़
के
उन
अनसु
ने
तू
फा
नों
में
तला
श
जा
री
है,
उम्
र
का
ये
सफर
बा
की
है
अभी
तो
मे
री
रू
ह
में
ते
रा
असर
बा
की
है
शा
यद
मैं
ही
गलत
था
तु
झे
बा
हर
ढूँ
ढते
हु
ए
तू
तो
बै
ठी
थी
मे
रे
ही
भी
तर,
मु
झे
दे
खते
हु
ए
ओ
जिं
दगी,
मैं
तु
झे
कहाँ
मि
लूँ?
क्
या
खु
द
को
खो
कर
ही
मैं
तु
झे
चु
नूँ?
तू
धड़
कन
है,
तू
ही
मे
री
तला
श
है
तू
ही
तो
मे
रे
हर
खा
मो
श
लफ्
ज़
की
प्
या
स
है
जिं
दगी,
मैं
तु
झे
कहाँ
मि
लूँ?
तू
ही
मे
री
तला
श
है,
तू
ही
मे
री
प्
या
स
है
जिं
दगी...
मि
ल
गई
है
तू,
अब
यहीं
मे
रे
पा
स
है
सु
न
ना,
जिं
दगी...
बस
यहीं,
मे
रे
पा
स
है।