चलते
-चलते
रा
ह
में,
कि
तने
चे
हरे
छू
ट
गए,
कु
छ
अपने
थे
उम्
र
भर
के,
कु
छ
मतलब
से
जु
ड़
गए।
जि
सको
अपना
मा
न
लि
या
था,
वही
कभी
अनजा
न
हु
आ, **
ज़िं
दगी
का
सच
यही
है—
जो
मि
ला,
वो
एक
दि
न
जु
दा
हु
आ।**
कल
की
खा
ति
र
आज
गँ
वा
या,
आज
की
खा
ति
र
कल
को
भू
ल
गए,
मु
ट्
ठी
में
जो
रे
त
थी
अपनी,
उसे
पकड़
ते
-पकड़
ते
हा
थ
ही
धू
ल
गए।
वक्
त
कि
सी
के
लि
ए
रु
कता
नहीं,
रा
जा
हो
या
को
ई
नि
र्
धन, **
ज़िं
दगी
का
सच
यही
है—
चलते
रहना
है
हर
क्
षण।**
धन-दौ
लत
के
पी
छे
भा
गे,
सु
ख
को
हमने
दू
र
कि
या,
जि
स
आँ
गन
में
हँ
सी
थी
कल
तक,
वहीं
अके
ले
बै
ठ
लि
या।
महल
मि
ले
तो
चै
न
न
आया,
झो
पड़ी
में
भी
रा
त
कटी,
जि
सने
सं
तो
ष
समझ
लि
या,
उसकी
ही
तो
दु
नि
या
सजी।
ना
म
कमा
या,
मा
न
कमा
या,
फि
र
भी
मन
क्
यों
खा
ली
है?
जि
स
सु
ख
को
कल
ढूँ
ढ़
रहे
थे,
वो
तो
आज
की
खु
शहा
ली
है।
कल
कि
सने
दे
खा
है
जग
में,
आज
ही
जी
वन
का
धन, **
ज़िं
दगी
का
सच
यही
है—
जी
लो
खु
लकर
हर
एक
क्
षण।**
रि
श्
ते
भी
मौ
सम
जै
से
हैं,
कु
छ
बरसें,
कु
छ
सू
ख
जा
एँ,
कु
छ
रि
श्
ते
बि
न
बो
ले
ही
जी
वन
भर
सा
थ
नि
भा
एँ।
खू
न
के
रि
श्
ते
पा
स
हों
फि
र
भी
मन
से
को
ई
दू
र
रहे,
कभी
अजनबी
अपना
बन
जा
ए,
कभी
अपना
मजबू
र
रहे।
जब
तक
साँ
सें
सा
थ
हैं
अपनी,
तब
तक
सब
सं
सा
र
हमा
रा,
साँ
स
रु
की
तो
कौ
न
कहे
गा— “
यह
था
मे
रा,
यह
था
तु
म्
हा
रा।”
खा
ली
हा
थ
आए
थे
जग
में,
खा
ली
हा
थ
ही
जा
ना
है, **
ज़िं
दगी
का
सच
यही
है—
कु
छ
भी
सा
थ
नहीं
ले
जा
ना
है।**
इसलि
ए
नफ़
रत
कम
कर
दे
ना,
प्
या
र
जरा
-सा
ज्
या
दा
करना,
जि
ससे
रू
ठे
हो
आज
तलक
तु
म,
आज
ही
जा
कर
उसको
मना
ना।
क्
या
पता
फि
र
समय
मि
ले
न
मि
ले,
क्
या
पता
फि
र
शा
म
ढले
न
ढले, **
ज़िं
दगी
बहु
त
छो
टी
है
या
रों—
इसे
शि
का
यत
में
मत
खो
दे
ना।**
कल
की
चिं
ता
छो
ड़
मु
सा
फि
र,
आज
को
अपना
हो
ने
दे,
आँ
खों
में
कु
छ
सपने
रख
और
दि
ल
को
थो
ड़ा
रो
ने
दे।
हा
र
मि
ले
तो
सी
ख
समझना,
जी
त
मि
ले
तो
वि
नम्
र
रहना,
और
मि
ले
जब
आखि
री
सफ़
र
तो
हँ
सते
-हँ
सते
वि
दा
कहना। **
न
दौ
लत
सा
थ
जा
एगी,
न
शो
हरत
की
कहा
नी,
अं
त
में
बस
या
द
रहें
गे—
कि
से
दी
कि
तनी
नि
शा
नी।
ज़िं
दगी
का
अर्
थ
यही
है—
प्
या
र
बाँ
टो,
मु
स्
का
न
दो,
जब
तक
धड़
कन
बा
की
है
दि
ल
में,
तब
तक
जी
वन
को
जा
न
लो।**
चलते
-चलते
रा
ह
में,
कि
तने
चे
हरे
छू
ट
गए,
कु
छ
अपने
थे
उम्
र
भर
के,
कु
छ
मतलब
से
जु
ड़
गए... **
ज़िं
दगी
का
सच
यही
है—
हम
आए
हैं
कु
छ
पल
के
लि
ए,
मगर
या
दों
में
रह
जा
ने
के
लि
ए।**