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The Truth Of Life

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Lyrics

चलते

-चलते

रा

में,

कि

तने

चे

हरे

छू

गए,

कु

अपने

थे

उम्

भर

के,

कु

मतलब

से

जु

ड़

गए।

जि

सको

अपना

मा

लि

या

था,

वही

कभी

अनजा

हु

आ, **

ज़िं

दगी

का

सच

यही

है—

जो

मि

ला,

वो

एक

दि

जु

दा

हु

आ।**

कल

की

खा

ति

आज

गँ

वा

या,

आज

की

खा

ति

कल

को

भू

गए,

मु

ट्

ठी

में

जो

रे

थी

अपनी,

उसे

पकड़

ते

-पकड़

ते

हा

ही

धू

गए।

वक्

कि

सी

के

लि

रु

कता

नहीं,

रा

जा

हो

या

को

नि

र्

धन, **

ज़िं

दगी

का

सच

यही

है—

चलते

रहना

है

हर

क्

षण।**

धन-दौ

लत

के

पी

छे

भा

गे,

सु

को

हमने

दू

कि

या,

जि

आँ

गन

में

हँ

सी

थी

कल

तक,

वहीं

अके

ले

बै

लि

या।

महल

मि

ले

तो

चै

आया,

झो

पड़ी

में

भी

रा

कटी,

जि

सने

सं

तो

समझ

लि

या,

उसकी

ही

तो

दु

नि

या

सजी।

ना

कमा

या,

मा

कमा

या,

फि

भी

मन

क्

यों

खा

ली

है?

जि

सु

को

कल

ढूँ

ढ़

रहे

थे,

वो

तो

आज

की

खु

शहा

ली

है।

कल

कि

सने

दे

खा

है

जग

में,

आज

ही

जी

वन

का

धन, **

ज़िं

दगी

का

सच

यही

है—

जी

लो

खु

लकर

हर

एक

क्

षण।**

रि

श्

ते

भी

मौ

सम

जै

से

हैं,

कु

बरसें,

कु

सू

जा

एँ,

कु

रि

श्

ते

बि

बो

ले

ही

जी

वन

भर

सा

नि

भा

एँ।

खू

के

रि

श्

ते

पा

हों

फि

भी

मन

से

को

दू

रहे,

कभी

अजनबी

अपना

बन

जा

ए,

कभी

अपना

मजबू

रहे।

जब

तक

साँ

सें

सा

हैं

अपनी,

तब

तक

सब

सं

सा

हमा

रा,

साँ

रु

की

तो

कौ

कहे

गा— “

यह

था

मे

रा,

यह

था

तु

म्

हा

रा।”

खा

ली

हा

आए

थे

जग

में,

खा

ली

हा

ही

जा

ना

है, **

ज़िं

दगी

का

सच

यही

है—

कु

भी

सा

नहीं

ले

जा

ना

है।**

इसलि

नफ़

रत

कम

कर

दे

ना,

प्

या

जरा

-सा

ज्

या

दा

करना,

जि

ससे

रू

ठे

हो

आज

तलक

तु

म,

आज

ही

जा

कर

उसको

मना

ना।

क्

या

पता

फि

समय

मि

ले

मि

ले,

क्

या

पता

फि

शा

ढले

ढले, **

ज़िं

दगी

बहु

छो

टी

है

या

रों—

इसे

शि

का

यत

में

मत

खो

दे

ना।**

कल

की

चिं

ता

छो

ड़

मु

सा

फि

र,

आज

को

अपना

हो

ने

दे,

आँ

खों

में

कु

सपने

रख

और

दि

को

थो

ड़ा

रो

ने

दे।

हा

मि

ले

तो

सी

समझना,

जी

मि

ले

तो

वि

नम्

रहना,

और

मि

ले

जब

आखि

री

सफ़

तो

हँ

सते

-हँ

सते

वि

दा

कहना। **

दौ

लत

सा

जा

एगी,

शो

हरत

की

कहा

नी,

अं

में

बस

या

रहें

गे—

कि

से

दी

कि

तनी

नि

शा

नी।

ज़िं

दगी

का

अर्

यही

है—

प्

या

बाँ

टो,

मु

स्

का

दो,

जब

तक

धड़

कन

बा

की

है

दि

में,

तब

तक

जी

वन

को

जा

लो।**

चलते

-चलते

रा

में,

कि

तने

चे

हरे

छू

गए,

कु

अपने

थे

उम्

भर

के,

कु

मतलब

से

जु

ड़

गए... **

ज़िं

दगी

का

सच

यही

है—

हम

आए

हैं

कु

पल

के

लि

ए,

मगर

या

दों

में

रह

जा

ने

के

लि

ए।**

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