[male vocals] ओह
हो,
सनम
कहते
हैं
दि
ल
की
बा
त,
आँ
खों
में
छु
पी
है
हम
ढूँ
ढते
हैं
उनको
जो
मि
ल
कर
नहीं
मि
लते
उन
रा
हों
पे
चलते
हैं
जहाँ
रा
हबर
नहीं
मि
लते
हम
जा
नते
हैं
उनको
जो
दि
ल
में
तो
रहते
हैं
पर
सा
मने
आते
ही
नज़
र
से
नज़
र
नहीं
मि
लते
मि
लके
भी
जो
न
मि
ले,
ऐसे
सनम
की
तला
श
है
जो
पा
स
रहकर
भी
दू
र
रहे,
उस
वहम
की
तला
श
है
आँ
खों
में
बसे
हैं
जो,
पर
हा
थों
में
न
आ
सके
दि
ल
में
धड़
कते
हैं
जो,
पर
अपना
न
कहा
सके
वो
फू
ल
जो
खि
लते
हैं
दि
ल
के
ही
वी
रा
ने
में
वै
से
तो
कि
सी
बा
ग़
के
गु
लशन
में
नहीं
मि
लते
ढूँ
ढा
है
उन्
हें
हमने
तमन्
ना
की
नि
गा
हों
से
पर
ख़्
वा
बों
के
परिं
दे
तो
हक़ी
क़
त
में
नहीं
मि
लते
क्
या
बा
त
है,
यूँ
ही
तो
नहीं
रो
ते
हम
मि
लके
भी
जो
न
मि
ले,
ऐसे
सनम
की
तला
श
है
जो
पा
स
रहकर
भी
दू
र
रहे,
उस
वहम
की
तला
श
है
आँ
खों
में
बसे
हैं
जो,
पर
हा
थों
में
न
आ
सके
दि
ल
में
धड़
कते
हैं
जो,
पर
अपना
न
कहा
सके
सु
न
ना,
ये
दू
री
कै
सी
है
ये
अधू
री
कहा
नी,
ये
मजबू
री
कै
सी
है
धड़
कनों
में
शो
र
है,
पर
लब
खा
मो
श
हैं
शा
यद
यही
इश्
क
की
हसी
न
मदहो
शी
है
हम
ढूँ
ढते
हैं
उनको
ही
हर
मो
ड़
पे
अक्
सर
जो
मि
लते
तो
हैं
पर
कभी
मु
कम्
मल
नहीं
हो
ते
तड़
प
ये
रू
ह
की
है,
बदन
की
नहीं
ये
वो
सि
ता
रे
हैं
जो
आसमा
न
में
तो
हैं,
पर
हा
थों
में
नहीं
मि
लके
भी
जो
न
मि
ले,
ऐसे
सनम
की
तला
श
है
जो
पा
स
रहकर
भी
दू
र
रहे,
उस
वहम
की
तला
श
है
आँ
खों
में
बसे
हैं
जो,
पर
हा
थों
में
न
आ
सके
दि
ल
में
धड़
कते
हैं
जो,
पर
अपना
न
कहा
सके
वो
मि
लके
भी
ना
मि
ल
पा
ये
बस
या
दों
में
ही
रह
गये
ओह
हो,
मि
लके
भी
ना
मि
ल
पा
ये
अधू
रे
हम,
अधू
रे
तु
म,
बस
या
दें
बा
की