[female
vocals] (
Piano
melody
fades
in
with
soft
strings)
ओह,
हो,
हो...
सब
सफर
है,
सब
खया
ल
है
कहा
नी
का
ये
दौ
र
है
को
ई
मे
रे
कहा
नि
यों
में,
मैं
कि
सी
और
की
कहा
नि
यों
में
हम
सब
कि
रदा
र
हैं,
कई
अलग-अलग
कहा
नि
यों
में
कि
सी
का
पन्
ना
को
रा
है,
कि
सी
का
स्
या
ही
से
भरा
को
ई
धू
प
का
टु
कड़ा
है,
को
ई
रा
त
का
है
खड़ा
हम
ढूं
ढते
हैं
मं
ज़ि
लें,
हर
मो
ड़
के
उस
पा
र
पर
हकी
कत
ये
है
कि,
खु
द
से
ही
है
सा
रा
प्
या
र
ये
उलझनें
ये
भा
गदौ
ड़,
सब
एक
छो
टा
सा
हि
स्
सा
है
हमा
री
ज़िं
दगा
नी
का,
ये
अनकहा
सा
कि
स्
सा
है
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपने
अनु
भव
की
अपनी
कहा
नी
कल
फि
र
ये
कहा
नी
ही,
हो
जा
नी
है
पु
रा
नी
को
ई
कहा
नी
सच्
ची
है,
को
ई
कहा
नी
है
झू
ठी
हर
कहा
नी
को
एक
दि
न,
हो
जा
नी
है
कहा
नी
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपनी
ये
दा
स्
तां
वो
नि
भि
श
कु
मा
र
सिं
ह,
तू
भी
तो
एक
हि
स्
सा
है
ते
री
कलम
की
स्
या
ही
में,
बि
खरा
हु
आ
सा
कि
स्
सा
है
ज़ि
म्
मे
दा
रि
यों
के
बो
झ
में,
थो
ड़ा
सा
तू
मु
स्
कु
रा
ख्
वा
बों
के
इस
मे
ले
में,
खु
द
को
तू
आज
ढूँ
ढ
ले
ज़रा
कल
क्
या
हो
गा
कि
सने
दे
खा,
आज
में
ही
सब
जी
लें
हम
बी
ते
हु
ए
कल
की
या
दें,
आने
वा
ले
कल
का
गम
सब
छो
ड़
के
आगे
बढ़
जा,
नया
तू
रा
स्
ता
चु
न
ले
अपने
मन
की
धु
न
को
तू,
बस
एक
बा
र
फि
र
सु
न
ले
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपने
अनु
भव
की
अपनी
कहा
नी
कल
फि
र
ये
कहा
नी
ही,
हो
जा
नी
है
पु
रा
नी
को
ई
कहा
नी
सच्
ची
है,
को
ई
कहा
नी
है
झू
ठी
हर
कहा
नी
को
एक
दि
न,
हो
जा
नी
है
कहा
नी
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपनी
ये
दा
स्
तां
कभी
गि
रना
कभी
सं
भलना,
यही
तो
है
असली
मज़ा
मं
ज़ि
ल
तक
पहुँ
चने
का,
है
ये
ही
सही
रज़ा
कि
ता
ब
के
हर
पन्
ने
पर,
ते
रा
ना
म
लि
खा
हो
गा
जो
आज
मु
श्
कि
ल
लगता
है,
वो
कल
आसा
न
लि
खा
हो
गा
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपने
अनु
भव
की
अपनी
कहा
नी
कल
फि
र
ये
कहा
नी
ही,
हो
जा
नी
है
पु
रा
नी
को
ई
कहा
नी
सच्
ची
है,
को
ई
कहा
नी
है
झू
ठी
हर
कहा
नी
को
एक
दि
न,
हो
जा
नी
है
कहा
नी
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपनी
ये
दा
स्
तां
कहा
नी
है,
ये
कहा
नी
ही
रहे
गी
ते
रे
अनु
भव
की
रो
शनी,
दु
नि
या
ये
कहे
गी
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में... (
Music
fades
out
slowly
with
acoustic
guitar
and
strings)
सब
बस
कहा
नी
है...