A song made by av9978423
A song made by av9978423
हाँ... येह...
अंदर की आवाज़... सुन रहा हूँ आज...
गली गली भटका, रात दिन ये सोचा
क्या है सही, क्या है गलत, किसने मुझे रोका?
ख्वाबों के पीछे भागा, नींदों को त्यागा (no cap)
हर सुबह उठ के, नई उम्मीद जागा
ये दुनियादारी, देती है ताने
पर मैं हूँ अटल, ना किसी के माने
मेरी धुन मेरी राह, मैं ही मेरा कायल
बनाऊंगा इतिहास, ना बैठूंगा कायर
कहाँ मेरा रास्ता, कहाँ मेरी मंज़िल?
धुंधला सा शहर, आँखों में मुश्किल
ये सफ़र है लंबा, दिल में है हलचल
ढूँढ रहा खुद को, हर एक पल, हर एक पल (चल!)
दर्द भी है साथी, रातों की स्याही
लिखता हूँ कहानी, कलम से गवाही
चमकेंगे सितारे, मेरी भी बारी है (येह!)
जो जलते हैं मुझसे, उनकी भी बीमारी है
ये शोर शराबा, कुछ नहीं कर पाएगा
मेरा नाम एक दिन, हर जगह छाएगा
नशे में धुत्त नहीं, होश में हूँ पूरा
सच्चाई का पुजारी, हर ख्वाब है अधूरा
कहाँ मेरा रास्ता, कहाँ मेरी मंज़िल?
धुंधला सा शहर, आँखों में मुश्किल
ये सफ़र है लंबा, दिल में है हलचल
ढूँढ रहा खुद को, हर एक पल, हर एक पल
बस यही है मेरा सफ़र... हाँ...
चल रहा हूँ मैं... धुंड रहा हूँ मैं...