[female
vocals] (
हल्
की
बां
सु
री
की
धु
न)
ज़िं
दगी
के
पन्
नों
पर,
स्
या
ही
बि
खर
रही
है
हर
मो
ड़
पर
एक
नई
रा
ह,
उभर
रही
है
को
ई
मे
रे
कहा
नि
यों
में,
मैं
कि
सी
और
की
कहा
नि
यों
में
हम
सब
कि
रदा
र
हैं,
कई
अलग-अलग
कहा
नि
यों
में
कि
सी
पन्
ने
पर
धू
प
है,
तो
कि
सी
पर
है
सा
या
जो
भी
हमने
पा
या,
वो
सि
र्
फ
एक
ख्
या
ब
है
आया
कि
रदा
र
बदलते
हैं,
और
मं
च
भी
बदल
जा
ता
है
इं
सा
न
वही
रहता
है,
बस
वक़्
त
सं
भल
जा
ता
है
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपने
अनु
भव
की
डगर
पर
हर
पल
को
बु
न
लो,
अपनी
मे
हनत
के
सफर
पर
को
ई
कहा
नी
सच्
ची
है,
को
ई
कहा
नी
झू
ठी
है
अं
त
में
ये
रू
ह,
खु
द
से
ही
तो
रू
ठी
है
हर
कहा
नी
को
भी
एक
दि
न,
कहा
नी
ही
हो
जा
नी
है
ये
ज़िं
दगा
नी
बस,
एक
या
द
बनकर
खो
जा
नी
है
कल
की
फि
क्
र
में
हम,
आज
को
क्
यों
गं
वा
ते
हैं
सू
रज
के
ढलते
ही,
हम
क्
यूँ
घबरा
ते
हैं
नि
भि
श
कु
मा
र
सिं
ह,
तू
लि
ख
अपनी
दा
स्
तां
आज
ये
वक़्
त
ते
रा
है,
तू
ही
है
इस
सफर
का
सरता
ज
बु
लं
दि
यों
को
छू
ने
की,
ये
प्
या
स
तू
जगा
ले
सपनों
के
आसमा
न
में,
तू
खु
द
को
बि
ठा
ले
नज़रि
या
बदल
दे,
तो
मं
ज़ि
लें
भी
बदले
गी
कि
स्
मत
की
लकी
रें,
अब
ते
रे
सा
थ
चले
गी
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपने
अनु
भव
की
डगर
पर
हर
पल
को
बु
न
लो,
अपनी
मे
हनत
के
सफर
पर
को
ई
कहा
नी
सच्
ची
है,
को
ई
कहा
नी
झू
ठी
है
अं
त
में
ये
रू
ह,
खु
द
से
ही
तो
रू
ठी
है
हर
कहा
नी
को
भी
एक
दि
न,
कहा
नी
ही
हो
जा
नी
है
ये
ज़िं
दगा
नी
बस,
एक
या
द
बनकर
खो
जा
नी
है
सच्
चा
ई
की
रा
ह
मु
श्
कि
ल
है,
पर
तू
रु
कना
नहीं
तू
फा
नों
के
सा
मने,
तू
कभी
झु
कना
नहीं
ये
कि
रदा
र
ते
रा
है,
इसे
बखू
बी
नि
भा
ले
अपने
वजू
द
की
आग,
तू
दि
ल
में
जला
ले
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपने
अनु
भव
की
डगर
पर
हर
पल
को
बु
न
लो,
अपनी
मे
हनत
के
सफर
पर
को
ई
कहा
नी
सच्
ची
है,
को
ई
कहा
नी
झू
ठी
है
अं
त
में
ये
रू
ह,
खु
द
से
ही
तो
रू
ठी
है
हर
कहा
नी
को
भी
एक
दि
न,
कहा
नी
ही
हो
जा
नी
है
ये
ज़िं
दगा
नी
बस,
एक
या
द
बनकर
खो
जा
नी
है
कहा
नी
को
कल
फि
र,
कहा
नी
ही
हो
जा
नी
है
जी
ले
आज,
यही
तो
ते
री
नि
शा
नी
है
हर
मो
ड़
पर
एक
नई
रा
ह,
उभर
रही
है