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कभी शाम ढले

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Lyrics

[male vocals] कभी

शा

ढले

तो

मे

रे

दि

में

जा

ना

ओय...

एक

दि

या

मे

री

उम्

मी

दों

का

यहाँ

जला

जा

ना

मद्

धम-सी

चल

रही

है

जो

अब

तक

ज़िं

दगी

तु

अपनी

सां

सों

की

गरमा

हट

दे

जा

ना

ग़

के

जो

सा

फै

ले

हैं

चा

रो

तरफ़

अपनी

एक

मु

स्

का

से

उन्

हें

मि

टा

जा

ना

धड़

कनों

में

बसी

है

जो

प्

या

अधू

री

उसे

अपनी

नज़

रों

से

आज

बु

झा

जा

ना

मु

स्

कु

रा

के

कह

दो

कि

तु

मे

रे

हो

सा

री

दू

रि

यों

को

आज

मि

टा

जा

ना

कभी

शा

ढले

तो

मे

रे

दि

में

जा

ना

एक

दि

या

मे

री

उम्

मी

दों

का

यहाँ

जला

जा

ना

मे

री

तन्

हा

इयों

को

अब

को

बहा

ना

चा

हि

तु

म्

हें

सी

ने

से

लगा

कर

कु

पल

बि

ता

ना

चा

हि

कभी

शा

ढले

तो

मे

रे

दि

में

जा

ना

उन्

हें

समे

टकर

अपनी

आग़ो

में

सजा

जा

ना

रा

तों

की

खा

मो

शी

में

जो

शो

सा

है

उसे

अपनी

मी

ठी

बा

तों

से

सु

ला

जा

ना

वक्

की

ये

रफ़्

ता

भी

थम

जा

एगी

तु

बस

मे

रे

करी

आके

ठहर

जा

ना

क्

या

बा

है,

तु

म्

हा

री

या

दों

का

असर

है

इन

हसी

लम्

हों

को

आज

अमर

कर

जा

ना

कभी

शा

ढले

तो

मे

रे

दि

में

जा

ना

एक

दि

या

मे

री

उम्

मी

दों

का

यहाँ

जला

जा

ना

मे

री

तन्

हा

इयों

को

अब

को

बहा

ना

चा

हि

तु

म्

हें

सी

ने

से

लगा

कर

कु

पल

बि

ता

ना

चा

हि

कभी

शा

ढले

तो

मे

रे

दि

में

जा

ना

मगर

सु

सु

नो...

आओ

तो

इस

तरह

आओ

कि

रा

स्

ता

भू

जा

वा

पसी

का

को

भी

मं

ज़

फि

दो

हरा

ठहर

जा

ऐसे

जै

से

सा

हि

पर

समं

दर

मु

झे

अपने

ना

कर

जा

ओ,

और

कभी

वा

पस

ना

जा

ओह

हो...

दि

की

ये

गु

ज़ा

रि

है

मा

जा

ना

चाँ

दनी

भी

खि

ड़

की

पे

इं

तज़ा

करती

है

तु

आकर

इस

रा

को

गु

लज़ा

कर

जा

ना

ख्

वा

बों

की

दु

नि

या

में

खो

गए

हैं

हम

अब

हकी

कत

बनके

मे

री

रू

में

समा

जा

ना

धू

मचे

गी

जब

तु

मे

रे

पा

हो

गे

इस

पल

को

अपनी

या

दों

में

सजा

जा

ना

ज़िं

दगी

के

सफ़

में

हमसफ़

बनके

अब

उम्

भर

के

लि

तु

यहीं

रु

जा

ना

कभी

शा

ढले

तो

मे

रे

दि

में

जा

ना

एक

दि

या

मे

री

उम्

मी

दों

का

यहाँ

जला

जा

ना

मे

री

तन्

हा

इयों

को

अब

को

बहा

ना

चा

हि

तु

म्

हें

सी

ने

से

लगा

कर

कु

पल

बि

ता

ना

चा

हि

कभी

शा

ढले

तो

मे

रे

दि

में

जा

ना

मगर

सु

सु

नो...

आओ

तो

इस

तरह

आओ

कि

रा

स्

ता

भू

जा

वा

पसी

का

को

भी

मं

ज़

फि

दो

हरा

ठहर

जा

ऐसे

जै

से

सा

हि

पर

समं

दर

मु

झे

अपने

ना

कर

जा

ओ,

और

कभी

वा

पस

ना

जा

ओह

हो...

दि

की

ये

गु

ज़ा

रि

है

मा

जा

ना

चाँ

दनी

भी

खि

ड़

की

पे

इं

तज़ा

करती

है

तु

आकर

इस

रा

को

गु

लज़ा

कर

जा

ना

सु

ना,

बस

ठहर

जा

ना।

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