[male vocals] कभी
शा
म
ढले
तो
मे
रे
दि
ल
में
आ
जा
ना
ओय...
एक
दि
या
मे
री
उम्
मी
दों
का
यहाँ
जला
जा
ना
मद्
धम-सी
चल
रही
है
जो
अब
तक
ज़िं
दगी
तु
म
अपनी
सां
सों
की
गरमा
हट
दे
जा
ना
ग़
म
के
जो
सा
ए
फै
ले
हैं
चा
रो
तरफ़
अपनी
एक
मु
स्
का
न
से
उन्
हें
मि
टा
जा
ना
धड़
कनों
में
बसी
है
जो
प्
या
स
अधू
री
उसे
अपनी
नज़
रों
से
आज
बु
झा
जा
ना
मु
स्
कु
रा
के
कह
दो
कि
तु
म
मे
रे
हो
सा
री
दू
रि
यों
को
आज
मि
टा
जा
ना
कभी
शा
म
ढले
तो
मे
रे
दि
ल
में
आ
जा
ना
एक
दि
या
मे
री
उम्
मी
दों
का
यहाँ
जला
जा
ना
मे
री
तन्
हा
इयों
को
अब
को
ई
बहा
ना
चा
हि
ए
तु
म्
हें
सी
ने
से
लगा
कर
कु
छ
पल
बि
ता
ना
चा
हि
ए
कभी
शा
म
ढले
तो
मे
रे
दि
ल
में
आ
जा
ना
उन्
हें
समे
टकर
अपनी
आग़ो
श
में
सजा
जा
ना
रा
तों
की
खा
मो
शी
में
जो
शो
र
सा
है
उसे
अपनी
मी
ठी
बा
तों
से
सु
ला
जा
ना
वक्
त
की
ये
रफ़्
ता
र
भी
थम
जा
एगी
तु
म
बस
मे
रे
करी
ब
आके
ठहर
जा
ना
क्
या
बा
त
है,
तु
म्
हा
री
या
दों
का
असर
है
इन
हसी
न
लम्
हों
को
आज
अमर
कर
जा
ना
कभी
शा
म
ढले
तो
मे
रे
दि
ल
में
आ
जा
ना
एक
दि
या
मे
री
उम्
मी
दों
का
यहाँ
जला
जा
ना
मे
री
तन्
हा
इयों
को
अब
को
ई
बहा
ना
चा
हि
ए
तु
म्
हें
सी
ने
से
लगा
कर
कु
छ
पल
बि
ता
ना
चा
हि
ए
कभी
शा
म
ढले
तो
मे
रे
दि
ल
में
आ
जा
ना
मगर
सु
न
सु
नो...
आओ
तो
इस
तरह
आओ
कि
रा
स्
ता
भू
ल
जा
ओ
वा
पसी
का
को
ई
भी
मं
ज़
र
फि
र
न
दो
हरा
ओ
ठहर
जा
ओ
ऐसे
जै
से
सा
हि
ल
पर
समं
दर
मु
झे
अपने
ना
म
कर
जा
ओ,
और
कभी
वा
पस
ना
जा
ओ
ओह
हो...
दि
ल
की
ये
गु
ज़ा
रि
श
है
मा
न
जा
ना
चाँ
दनी
भी
खि
ड़
की
पे
इं
तज़ा
र
करती
है
तु
म
आकर
इस
रा
त
को
गु
लज़ा
र
कर
जा
ना
ख्
वा
बों
की
दु
नि
या
में
खो
गए
हैं
हम
अब
हकी
कत
बनके
मे
री
रू
ह
में
समा
जा
ना
धू
म
मचे
गी
जब
तु
म
मे
रे
पा
स
हो
गे
इस
पल
को
अपनी
या
दों
में
सजा
जा
ना
ज़िं
दगी
के
सफ़
र
में
हमसफ़
र
बनके
अब
उम्
र
भर
के
लि
ए
तु
म
यहीं
रु
क
जा
ना
कभी
शा
म
ढले
तो
मे
रे
दि
ल
में
आ
जा
ना
एक
दि
या
मे
री
उम्
मी
दों
का
यहाँ
जला
जा
ना
मे
री
तन्
हा
इयों
को
अब
को
ई
बहा
ना
चा
हि
ए
तु
म्
हें
सी
ने
से
लगा
कर
कु
छ
पल
बि
ता
ना
चा
हि
ए
कभी
शा
म
ढले
तो
मे
रे
दि
ल
में
आ
जा
ना
मगर
सु
न
सु
नो...
आओ
तो
इस
तरह
आओ
कि
रा
स्
ता
भू
ल
जा
ओ
वा
पसी
का
को
ई
भी
मं
ज़
र
फि
र
न
दो
हरा
ओ
ठहर
जा
ओ
ऐसे
जै
से
सा
हि
ल
पर
समं
दर
मु
झे
अपने
ना
म
कर
जा
ओ,
और
कभी
वा
पस
ना
जा
ओ
ओह
हो...
दि
ल
की
ये
गु
ज़ा
रि
श
है
मा
न
जा
ना
चाँ
दनी
भी
खि
ड़
की
पे
इं
तज़ा
र
करती
है
तु
म
आकर
इस
रा
त
को
गु
लज़ा
र
कर
जा
ना
सु
न
ना,
बस
ठहर
जा
ना।